Saturday, January 21, 2017

बड़े कारखानों में,
कपड़े कैसे लाचारों से पड़े मिलते हैं,
नहीं?
बड़ी बड़ी लाल थैलियों में,
महीनों कैद,
लिपटे हुए,
पड़े -पड़े,
लोथड़े बन जाते हैं,
ठीक हम इंसानों की तरह,
हम भी पड़े पड़े लोथड़े बन जाते हैं।
कैसे एक कमरे से दुसरे कमरे, से तीसरे,
और हर दरवाज़े से,
कुछ शर्टों की चीखें आती हैं,
"बचाओ,बचाओ,बचाओ"
कुछ के हाथ सिल दिए गए हैं,
तो वो टगीं hangers में,
उम्र भर रहती हैं,
पर खुद को छुड़ा नहीं सकतीं,
कुछ enzyme wash की बदबू सह नहीं पातीं,
तो दम तोड़ देती हैं,
और आदमी कहता है "yarn कमज़ोर रहा होगा,
दूसरी उठा लाओ। "


-प्रणव मिश्र


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