Friday, January 20, 2017

जाओ फिर से पढ़ो।

सबने बस वो ही सुना,जो सुनाया मैंने,
कैसा महसूस हुआ?,
... कराया मैंने। 
तुमने ध्यान नहीं दिया,
या फिर नींद लग गयी होगी,
वरना  बस अभी तो,
तुमको प्रणव से था मिलाया मैंने। 
और..  . 
एक तो क़ाबिल लोगों से बड़ा परेशान हूँ मैं,
हर एक line को तोड़कर पूछते हैं,
"मतलब ?"
ये तो ऐसी बात हुई,
कि पहले चोट भी मुझे लगी,
फिर मल्हम भी मैंने खरीदा,
और पट्टी करके,
दिलासा भी, 
तुमको ही दिलाया मैंने। 


- प्रणव मिश्र 







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