Tuesday, January 10, 2017

3 a.m. #1


कुछ कुत्ते हैं,
जो मेरे parking में गाड़ी लगाने से लेकर,
घर के अंदर जाने तक,
आगे पीछे ... कूँ कूँ कूँ कूँ , करते रहते हैं,
पहले तो सब कुछ ठीक था,
पर अब बस follow करते हैं,
दिन- रात।  
उस दिन, 
एक कल का पिल्ला, hmm ?
न जाने कहाँ से आया,
और मेरे फीते पकड़ के नोचने लगा,
दाहिने जूते के। 
मैंने कहा " भाई scene क्या है?.. 
मैं ये घर छोड़ दूं? "
उसने ऊपर देखा, तो मुझे लगा शायद सुन रहा हो.. 
मैंने कहा "कल पूरे दो packet biscuit खिला दिए मैंने ,
तुम्हे पांच रुपये वाले, और तुमने चूं तक न की,"
वो बोला " कूँ"
मैंने कहा पहले तो अपनी vocabulary सही करो, 
वो बोला " कूँ ?"
"कूँ नहीं चूं तक न की, चूतिये!"
मैं कुछ आगे बढ़ा,
तो सारे, आगे पीछे, घर तक चले आये,
अच्छा घर पे Rana होता है जब,
तो बहुत insecure feel करता है,
इनको समझ में आता नहीं,
uncivilized जानवर साले,

कितनी बार ऐसा हुआ है,
मैं उससे चुरा के पुराने newspapers में परोस के,
इनके लिए उसकी pedigree भी लाया हूँ। 
कितनी बार ऐसा हुआ है,
जब उसकी chicken treats से मैंने 
इनको एक line  में बिठाया है,
पर लालच की भी एक हद होती है न,
मतलब वरना तुम मेरे,
जूते काट डालोगे,
मोहल्ले में चलने नहीं दोगे ,
uncivilized जानवर साले,

खैर किसी तरह अपने दरवाज़े तक आया,
और अंदर से lock करने से लेकर ऊपर balcony में,
जाने तक,
सब बाहर सड़क पर बैठे घूरते है,
शायद घन्टों। 
और एक सबसे छोटा वाला,
मुझे देखते ही बोला नीचे से "कूँ"
"कूँ नहीं चूं, चूतिये। "
"चूं!!"







  



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